constipation-&-acidity-blog

कब्ज और एसिडिटी दोनों चचेरे भाईयों की तरह है। जिस व्यक्ति को अपच की परेशानी होगी, उसे कब्ज और एसिडिटी अवश्य होगी। अपच पेट के ऊपरी भाग मेंं दर्द का एक व्यापक रूप है। अपच के लक्षण पेट का फूलना, खट्टी डकारें इत्यादि है। अपच का परिणाम होता है एसिडिटी। जिस कारण दिल की धड़कन, गैस्ट्रिक सूजन, अल्सर की शिकायत रहती है।

एसिडिटी क्या है?

Acidity Ka Ayurvedic ilaz

हर किसी ने अपने जीवनकाल में अपचन, अम्लता और कब्ज का अनुभव किया होता है। पेट के गैस्ट्रिक ग्रंथियों द्वारा अत्यधिक एसिड उत्पादन के परिणाम को ही एसिडिटी कहा जाता है। भोजन के पाचन के लिए सामान्य एसिड की आवश्यकता होती है लेकिन नीचे दिए गए कारणों से एसिड की मात्रा असामान्य हो जाती है:-

  • मांस-मछली व अत्यधिक मसालेदार खाद्य पदार्थो का सेवन करना।
  • पेट का अल्सर।
  • तनाव।
  • खाने के अंतराल के समय में बदलाव।
  • पेट में हेलिकोबैक्टीरियम पिलोरी जीवाणु संक्रमण।
  • सुस्त जीवनशैली।
  • नींद की कमी।
  • धूम्रपान और शराब की लत।
  • खराब आहार की आदत।

नॉन स्टेरॉइडल एंटी- इंफ्लेमेटरी का सेवन।

एसिडिटी से ग्रस्त मरीजों को भोजन खाने के बाद पेट में जलन महसूस होती है। साथ ही कब्ज और अपचन की समस्याएं भी इन रोगियों को होती है। अपचन और एसिडिटी पहले से ही परिभाषित है।

आओ जानें, कब्ज क्या है?

कब्ज एक बीमारी नहीं है यह एक समस्या है। कोलन के माध्यम से अवांछित भोजन को बाहर निकालने की गति जब धीमी हो जाती है तब कठोर फेकिल पदार्थ निर्मित होता है जिसे कब्ज कहा जाता है। आंतों की गति में कमी आना (सप्ताह में कम से कम तीन बार), कठिन और शुष्क मल कब्ज होने का संकेत है। व्यायाम न करना, तनाव, नींद की कमी, खराब आहार की आदत कब्ज के सामान्य कारणों में से कुछ है।

कब्ज और एसिडिटी के बीच संबंध :

क्या आपने सीने में जलन, खट्टी डकारें जैसी समस्याओं के बारे में सुना है। यह एक ऐसी सामान्य स्थिति है जो दिल की धड़कन को जला देने वाला अहसास कराती है। इसे छाती के नीचले भाग में महसूस किया जाता है। यह एसिड का गैस्ट्रो एसोफेजेल स्फिंकर के माध्यम से खाद्य पाइप में वापिस बहने के कारण होता है। जिस कारण सीने में जलन और खट्टी डकारें आती है, जिसका साइंटफिक नाम गैस्ट्रो एसोफेजियल रीफ्लक्स भी है।

अनियमित खान-पान के कारण व्यस्कों में इसके लक्षण ज्यादा देखे जाते है। बच्चे भी इस समस्या से पीडि़त होते है, लेकिन वे दिल की धड़कन महसूस नहीं कर पाते। बच्चों में इसके लक्षण शुष्क खांसी व अस्थमा के रूप में देखे गए है।

दवाएं जोकि इन समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार है (एंटासिड्स सहित रोलाइड्स, माइलंटा), निजातिडाइन, फेमोटिडाइन, लांसोप्राज़्ाोल इत्यादि।

सीने में जलन/खट्टी डकारों के लिए प्राकृतिक उपचार :

सीने में जलन और खट्टी डकारों से राहत पाने के लिए अक्सर हम एलोपैथिक दवाओं का सेवन करते है। जिससे सिर्फ कुछ देर के लिए ही आराम मिलता है। जिसका साइड इफेक्ट हमें कब्ज, पेट दर्द, पेट में सूजन, बैचेनी के रूप में सहना पड़ता है। स्थाई रूप से छुटकारा पाने के लिए एलोपैथिक नहीं बल्कि प्राकृतिक उपचार अपनाने की आवश्यकता है।

आप निम्नलिखित प्राकृतिक उपचारों को अपना सकते है :-

 एपल विनेगर का सेवन –

12 चम्मच पानी में एक से तीन चम्मच एपल विनेगर डाल कर मिक्स कर लें। इसका सेवन दिन में दो से दिन बार करें। इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन न करें, क्योंकि इसका सेवन शरीर को उपयुक्त एसिड देने के लिए किया जाता है। यहीं गैस्ट्रो एसोफेजल स्पिन्टरर को बंद करने या खोलने का संकेत देता है।

केला प्रेमी बनें –

eating-banana

केले में प्राकृतिक एंटासिड्स होते है, जो खट्टी डकारों के लिए बर्फ का काम करते है। दिन में एक केला खाने से एसिडिटी की समस्या नहीं रहती।

आधा कप एलोवेरा जूस का सेवन करें –

भोजन से पहले एलोवेरा जूस का आधा कप पीना पेट की समस्याओं के लिए चमत्कार साबित हो सकता है। यह पेट की सूजन को कम करने में लाभकारी है। साथ ही सनबर्न की रोकथाम के लिए भी कारगर माना जाता है।

एक चम्मच बेकिंग सोडा का सेवन –

बेकिंग सोडा को सोडियम बाइकार्बोनेट के रूप से जाना जाता है। यह पेट में एसिड के असर को बेअसर करने में कारगर होता है क्योंकि इसमें सात से अधिक पीएच युक्त मूल यौगिकों का मिश्रण है।

अदरक वाली चाय –

दो कप पानी में अदरक की जड़ के टुकड़े करके तीस मिनट तक उबालें। इसे भोजन से बीस मिनट पहले लें।

बादाम –

अपने भोजन के बाद 3 से 4 बादाम खाएं। यह स्वादिष्ट नट्स सीने में जलन / एसिड रिफ्लेक्स जैसी समस्याओं के लिए एंटीडोट के रूप में कार्य करती है।

सबसे महत्वपूर्ण उपाय यह है कि अपने आहार से ऐसी चीजों को निकालें जिनसे सीने में जलन और खट्टी डकारें जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है। अपनी दिनचर्या में उचित खान-पान के साथ नियमित व्यायाम भी आवश्यक है।

 

कब्ज और एसिडिटी को कैसे दूर भगाये – आयुर्वेदिक उपचार (Kabz Ka Ayurvedic Ilaz)
4.8 (96%) 5 votes

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Close